देहरादून । पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत भाजपा पर चुटकी लेने में नहीं चूकते, ताजा मामले में हरीश रावत ने हाल ही में सारा अली खान के श्रद्धापूर्वक केदारनाथ दर्शन को लेकर अपने ट्विटर पर लिख कर सनसनी फैला दी है । हरीश रावत ने लिखा
आज एक चिंताजनक मगर महत्वपूर्ण नहीं बयान समाचार पत्र में पढ़ने को मिला। सारा अली खान श्रद्धापूर्वक केदारनाथ पहुंचती हैं, पिछली बार भी पहुंचीं, इस बार भी पहुंचीं। वो नवाब पटौदी व शर्मिला टैगोर जी की पोती हैं और सैफ अली खान की बेटी है, उनकी आस्था है। लेकिन साथ-साथ अपने धर्म का भी पालन करती हैं, जो धर्म उनको पिता से मिला है। मगर कुछ कूपमंडूक लोग हैं, वो उनके वहां जाने को लेकर के फतवा जारी कर रहे हैं। भैया, ये कट्टरपंथिता कहां ले करके जाएगी हमको, हमारे समाज को, हमारे देश को, इस पर विचार करना चाहिए। धर्मपरायण होना एक बात है और कट्टर होना एक बात है।

आप मुलायम रह करके भी धर्मपरायण हो सकते हैं। अपने धर्म का पालन करिए, अपने धर्म के गुणों का प्रचार करिए। मगर कोई किसी देवता में आस्था रख रहा है, आप किसी को आस्था रखने से क्यों रोक रहे हैं? मैं जानता हूँ इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं होती है। मगर आस्था और मूर्ति पूजा में अंतर है। कोई आस्था रख रहा है, किसी स्थल में जा रहा है और वहां से हो सकता है वो ध्यान लगाकर के अल्लाह को भी याद कर रहे हों। क्योंकि दुनिया में सभी भूमि नारायण की है, सभी भूमि अल्लाह की है, सभी भूमि गॉड की है, भगवान की है।
कट्टरपंथिता से समाज और भारत यूँ ही बड़ा दुखी है। जब भी ऐसे समाचार मैं पढ़ता हूँ, चाहे किसी पक्ष से हों, इधर-उधर, दोनों तरफ आजकल कमी नहीं है ऐसे पहलवानों की जो केवल अपनी को चर्चा में लाने के लिए समाज को दंश देने का काम करते हैं। ये दोनों तरफ हैं—ये हिंदुओं में भी हैं, ये मुसलमानों में भी हैं और मगर ये किसी के हितैषी नहीं हैं, न हिंदू के हितैषी हैं, न मुसलमान के हितैषी हैं। ये धर्म और अपने धर्म के भी हितैषी नहीं हैं।