नई दिल्ली 29 जनवरी । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर की है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इनका देशभर में विरोध हो रहा है।अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल UGC के 2012 वाले विनियम ही लागू रहेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि नए नियमों में हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इसके खतरनाक और विभाजनकारी परिणाम हो सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए निवारण व्यवस्था बनी रहनी चाहिए और याचिकाकर्ताओं को न्याय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा, उसके दायरे और संवैधानिकता पर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने आशंका जताई कि नए नियम हॉस्टलों और शैक्षणिक परिसरों में अलगाव की भावना पैदा कर सकते हैं। इसी बीच, 2019 से लंबित याचिका के साथ सभी नई याचिकाओं को जोड़ते हुए कोर्ट ने 19 मार्च तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
UGC के नए विनियम 2026 पर अंतरिम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2026 के नए नियमों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि जब तक मामले का अंतिम निपटारा नहीं होता, तब तक ये नियम लागू नहीं होंगे।
2012 के पुराने विनियम रहेंगे प्रभावी
कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया कि देशभर के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में फिलहाल 2012 के UGC विनियम ही लागू रहेंगे।
CJI की चेतावनी: समाज में विभाजन का खतरा
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि यदि अदालत ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो नए नियमों के खतरनाक परिणाम हो सकते हैं और समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।