भाजपा नेताओं ने किस संवैधानिक अधिकार से बांटे सरकारी नियुक्ति पत्र ?

कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भोज ने भाजपा मंत्री धन सिंह रावत से माँगा जवाब

अल्मोड़ा, 28 जुलाई। अल्मोड़ा में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की उपस्थिति में भाजपा के पदाधिकारियों द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने की घटना पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भोज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकारी नियुक्तियां संविधान, कानून और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार संबंधित विभागों द्वारा दी जाती हैं।

भोज ने कहा कि भाजपा लगातार सरकार और संगठन के बीच की सीमाओं को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। सरकारी योजनाओं और नियुक्तियों का राजनीतिक लाभ लेने के लिए भाजपा सरकारी कार्यक्रमों का दुरुपयोग कर रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। यह उन युवाओं की मेहनत, योग्यता और चयन प्रक्रिया का परिणाम होता है जिन्होंने नियमों के अनुसार परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी की है। ऐसे अवसरों को किसी दल के प्रचार का माध्यम बनाना युवाओं के सम्मान के साथ अन्याय है।उन्होंने कहा कि यदि यह सरकारी कार्यक्रम था तो उसमें केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी ही नियुक्ति पत्र वितरित करें। यदि भाजपा के पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी, तो सरकार को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि इसके लिए कौन-सा आदेश जारी किया गया और किस नियम के तहत उन्हें यह अधिकार दिया गया।

कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा हर सरकारी उपलब्धि पर अपना राजनीतिक लेबल लगाने का प्रयास करती है, जबकि सरकारी योजनाएं और नियुक्तियां जनता के टैक्स के पैसे से संचालित होती हैं, किसी राजनीतिक दल के संसाधनों से नहीं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया जाए तथा भविष्य में सरकारी कार्यक्रमों की गरिमा बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शासन और राजनीतिक दलों की भूमिकाओं के बीच आवश्यक मर्यादा बनी रहे।

भूपेन्द्र सिंह भोज ने कहा कि सरकारी नियुक्तियां किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं होतीं, बल्कि संविधान और निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत दी जाती हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं द्वारा सरकारी नियुक्ति पत्र वितरित करना यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार प्रशासन और पार्टी संगठन के बीच का अंतर समाप्त कर चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने किस संवैधानिक अधिकार, किस सरकारी आदेश और किस हैसियत से सरकारी नियुक्ति पत्र बांटे? यदि यह सरकारी कार्यक्रम था तो मंच पर भाजपा के पदाधिकारी सरकारी भूमिका में क्यों थे, और यदि यह पार्टी का कार्यक्रम था तो सरकारी नियुक्ति पत्र वहां कैसे वितरित किए गए?

भोज ने आरोप लगाया कि भाजपा युवाओं में यह भ्रम फैलाना चाहती है कि सरकारी नौकरियां भाजपा की कृपा से मिलती हैं, जबकि सच्चाई यह है कि सरकारी नौकरियां संविधान, कानून और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के आधार पर दी जाती हैं, किसी राजनीतिक दल की मेहरबानी से नहीं।
उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार सरकारी योजनाओं, सरकारी कार्यक्रमों और सरकारी संसाधनों का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक प्रवृत्ति है और इससे सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से इस पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग करते हुए कहा कि यदि भाजपा नेताओं ने बिना किसी वैधानिक अधिकार के सरकारी नियुक्ति पत्र वितरित किए हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।और मंत्री धन सिंह रावत बताये की उनकी उपस्थित मैं भाजपा नेताओं को आपने किस संविधानिक अधिकार के साथ नियुक्ति पत्र बांटने का अधिकार दिया

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