राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत धमेडा की राधा रावत बनी आत्मनिर्भर

अल्मोड़ा, 03 सितम्बर । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार एवं आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकासखण्ड भिकियासैंण के ग्राम धमेडा की श्रीमती राधा रावत ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त किया और डेयरी एवं पशुपालन को अपनी आजीविका का साधन बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

राधा रावत, पत्नी अमर सिंह, समूह से जुड़ने से पूर्व गृहणी के रूप में कार्य करती थीं। उनके पास कोई व्यवसाय अथवा नियमित आजीविका का साधन नहीं था। प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के अवसरों के अभाव में परिवार की आर्थिक स्थिति भी अपेक्षाकृत कमजोर थी। वर्ष 2022 में ‘ज्योति स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। समूह की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के साथ उन्होंने ग्राम संगठन एवं क्लस्टर संगठन की गतिविधियों से भी जुड़कर आजीविका संबंधी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

एनआरएलएम के माध्यम से विकासखण्ड स्तर पर उपलब्ध डेयरी प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर श्रीमती राधा रावत ने पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन से संबंधित आवश्यक जानकारी और तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के उपरांत उन्होंने स्वरोजगार के रूप में पशुपालन एवं डेयरी व्यवसाय प्रारम्भ करने का निर्णय लिया। उन्होंने पंतनगर से एक गाय एवं एक भैंस खरीदी तथा राजस्थान से अच्छी नस्ल की बकरियां लेकर पशुपालन का कार्य प्रारम्भ किया। इसके साथ ही गांव में ही डेयरी व्यवसाय शुरू कर स्थानीय स्तर पर दूध की बिक्री प्रारम्भ की। धीरे-धीरे उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ और स्थानीय बाजार में उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। समूह से जुड़ने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पशुपालन एवं दुग्ध व्यवसाय ने श्रीमती राधा रावत की आजीविका को मजबूत आधार प्रदान किया है। वर्तमान में उन्हें इस व्यवसाय से लगभग ₹20 हजार प्रतिमाह की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है तथा उनकी वार्षिक आय लगभग ₹2.50 लाख तक पहुंच गई है।

उनके उत्पादों की बिक्री मुख्य रूप से धमेडा, घुघती एवं बाजन के स्थानीय बाजारों तथा स्थानीय दुकानों के माध्यम से की जा रही है। समूह से प्राप्त वित्तीय सहायता एवं विभागीय प्रशिक्षण ने उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। राधा रावत की सफलता यह दर्शाती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा सकता है। आज राधा रावत न केवल स्वयं की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बन रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *