देहरादून : उत्तराखण्ड की देवभूमि में एक अत्यंत संवेदनशील और दुखद घटना को लेकर कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा से जुड़े तत्वों द्वारा की जा रही राजनीति अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है। अंकिता भंडारी के नाम पर न्याय की बजाय राजनीतिक रोटियाँ सेंकने की कोशिशें की जा रही हैं, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि प्रदेश की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी हैं।
मुद्दे समाप्त हो चुके हैं, तो अब वामपंथी और कांग्रेस के लिए अंकिता भंडारी एक राजनीतिक टूलकिट बन चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों का न उत्तराखण्ड से कोई सरोकार है, न ही इस प्रकरण की वास्तविक समझ—वे दिल्ली से देहरादून आकर एक संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे बाहरी तत्वों की यह कोशिश उत्तराखण्ड की जनता को कतई स्वीकार्य नहीं है।
यह वही वामपंथी विचारधारा है, जिसने बार-बार देशविरोधी मानसिकता का परिचय दिया है। कभी ‘टुकड़े-टुकड़े’ जैसे नारे लगाने वालों का समर्थन,कभी आतंकवादी अफजल गुरु की फांसी का विरोध,कभी ‘लाल सलाम’ के नारे,तो कभी चीन का समर्थन करते हुए भारतीय सेना का अपमान।आज वही लोग देवभूमि उत्तराखण्ड में आकर अंकिता भंडारी के नाम पर राजनीति करने का दुस्साहस कर रहे हैं।
उत्तराखण्ड की जागरूक जनता भली-भांति जानती है कि इन लोगों का उद्देश्य न तो न्याय है और न ही पीड़िता के प्रति सच्ची संवेदना। इनका एकमात्र मकसद प्रदेश की शांति व्यवस्था को बाधित करना, सरकार को बदनाम करना और संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाना है। जिनका प्रदेश में कोई सामाजिक या राजनीतिक अस्तित्व नहीं है, वे यहां आकर भ्रम और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्पष्ट है कि उत्तराखण्ड की जनता ऐसे षड्यंत्रों को कभी सफल नहीं होने देगी। सरकार पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपना दायित्व निभा रही है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने और जनभावनाओं को भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। देवभूमि उत्तराखण्ड में अराजक राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है— यहां केवल न्याय, सत्य और शांति का मार्ग ही स्वीकार्य है।