रुद्रपुर 16 फरवरी। रुद्रपुर के इंदिरा चौक से देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की मूर्ति हटाया जाना केवल एक प्रतिमा को हटाना नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक इतिहास और एक सशक्त महिला नेतृत्व के सम्मान पर सीधा आघात है। सरकार आखिर किस मानसिकता के तहत इतिहास को मिटाने का प्रयास कर रही है? क्या विकास का मतलब यह है कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले नेताओं की स्मृतियों को ही समाप्त कर दिया जाए?
आज जब मुख्यमंत्री उद्घाटन के लिए रुद्रपुर जा रहे हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि आखिर किस भय या राजनीतिक द्वेष के कारण इंदिरा जी की मूर्ति हटाई गई। यह कदम न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार जनभावनाओं की कद्र करने के बजाय प्रतीकों की राजनीति में उलझी हुई है।
करन माहरा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी…मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि इतिहास मिटाने की कोशिशें कभी सफल नहीं होतीं। सम्मान छीनने वाली राजनीति का जवाब जनता लोकतांत्रिक तरीके से जरूर देगी : श्री करन माहरा (CWC सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड कांग्रेस)