देहरादून। एक तरफ उत्तराखंड के सैकड़ों स्कूल जर्जर हालात में टूटने को तैयार हैं, हजारों गांव पेयजल के लिए जूझ रहे हैं , तो दूसरी ओर उत्तराखंड के सांसद हैं कि वे अपनी सांसद निधि हरियाणा और यूपी पर बरसा रहे हैं। इनमे रानी साहिबा टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह सबसे आगे हैं।
एक RTI के अनुसार उत्तराखंड की सांसद निधि का बड़ा हिस्सा यूपी और हरियाणा के विकास में खर्च हुआ है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। दूसरे राज्यों के विकास पर दरियादिली दिखाने में टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह सबसे आगे हैं। उन्होंने यूपी के आगरा जिले पर विशेष ध्यान दिया है। इस जिले के लिए उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल एक करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की। इसमें फुटपाथ, पैदल मार्ग, पेयजल से जुड़े कार्य शामिल थे।
वहीं, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने हरियाणा में स्कूल, कॉलेज, सामुदायिक भवनों के लिए 25 लाख आवंटित किए। हालांकि नए नियमों के अनुसार 25 लाख की धनराशि अब सांसद किसी भी राज्य में खर्च कर सकते हैं।पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010-16) के दौरान स्वीकृत धनराशि 10 दिसंबर 2025 को आवंटित की गई। उन्होंने यूपी के गोरखपुर में जल निकासी, सड़कों आदि के लिए तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे। आरटीआई में इस बात का खुलासा होने पर लोग तमाम सवाल उठा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर टिहरी सांसद माला राजलक्ष्मी शाह का कहना है कि उत्तराखंड के लोग पूरे देश में रहते हैं। कुछ लोग अपनी जरूरतों के लिए मेरे पास आए थे तो कुछ कार्यों को मंजूरी दी गई है। कहा कि टिहरी का विकास उनकी प्राथमिकता है और सांसद निधि का अधिकांश हिस्सा यहीं खर्च होता है।
अल्मोड़ा से लोकसभा सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र से इतर नैनीताल जिले पर दरिया दिली दिखाई है। उन्होंने नैनीताल जिले में स्कूल व कॉलेजों में कमरों और हॉल के निर्माण लिए 27 जून 2025 को पांच लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। दूसरी राज्यों में निधि खर्च करने की छूट नियमों में हुए बदलाव से संभव हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के 13 अगस्त 2024 के पत्र के अनुसार, पीएम फंड खर्च में संशोधन किए गए हैं। अब सांसद देश में कहीं भी विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन, एक वित्तीय वर्ष में इसकी अधिकतम सीमा 50 लाख है।