प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सैन्य धाम के निर्माण में सामने आया बड़ा घोटाला – Raj Satta News

प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सैन्य धाम के निर्माण में सामने आया बड़ा घोटाला

49 करोड़ का बजट कैसे पहुंचा 99 करोड ?

आरटीआई से खुली ठेकेदार, इंजीनियर और अफसरों की मिलीभगत

देहरादून 17 जुलाई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट सैन्य धाम के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। जिस कारण सैन्य धाम प्रोजेक्ट की लागत लगभग दो गुना बढ़ गई है, व निर्धारित समय तय होने के बाद भी सैन्य धाम अबतक नहीं तैयार हो पाया है। देहरादून के आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने खुलासा किया है कि सैन्य धाम में टेंडर से लेकर निर्माण कार्यों में करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट 49 करोड़ का था, और अब यह 99 करोड़ तक पहुंच चुका है। एडवोकेट नेगी ने कहा कि ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह मामला देश के लिए शहीद सैनिकों से जुड़ा है। ऐसे में सैन्य धाम की पवित्रता बनी रहनी चाहिए, उन्होंने इसकी शिकायत सीबीआई से की है।

गौरतलब है कि देहरादून के पुरुकुल गांव में सैन्य धाम का निर्माण चल रहा है। सैन्य धाम के निर्माण के लिए अधिकांश धनराशि केंद्र सरकार ने दी है। यह प्रोजेक्ट 8 नवम्बर 2023 तक पूरा होना था, लेकिन पहले इसे इस वर्ष मार्च तक बढ़ा दिया गया और अब इस समय सीमा को बढ़ाकर अक्टूबर कर दिया गया है। एडवोकेट विकेश नेगी के अनुसार आरटीआई से खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड पेयजल संसाधन एवं विकास निर्माण निगम ने इसका ग्लोबल टेंडर ही जारी नहीं किया। पोर्टल पर जारी यह टेंडर 48 करोड़ का था। इसमें दो कंपनियों मैसर्स शिवकुमार अग्रवाल और मैसर्स एमएचपीएल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने भाग लिया। इस टेंडर को विभाग ने निरस्त कर दिया था और दोबारा से निविदा आमंत्रित की गयी।

तत्कालीन वित्त निदेशक ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाया और पूछा कि यह तकनीकी बिड खोली ही क्यों गई? आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार निगम ने इतनी बड़ी धनराशि का टेंडर बिना प्रशासनिक अनुमति के जारी किया था। टेंडर के लिए जिन दो कंपनियों ने निविदाएं दीं, उसके स्टाम्प और नोटरी एक ही वेंडर से किये गये। दोबारा अल्पकालीन टेंडर जारी किया गया, और इसके लिए दोबारा से उन्हीं दो कंपनियों ने आवेदन दिया। इस बार यह ठेका मैसर्स शिव कुमार अग्रवाल को दे दिया गया। टेंडर की धनराशि अब 49 करोड कर दी गयी थी । विभाग ने ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए कंटीजेंसी का लगभग एक करोड़ 9 लाख रुपये भी छोड़ दिये। टेंडर ओवरप्राइस था और इसे ग्लोबल नहीं किया गया।

एडवोकेट नेगी के अनुसार आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक पेयजल निगम ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी विकासनगर यूनिट के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंद्र कुमार को दी। जब रविंद्र का तबादला देहरादून हुआ तो वह अपने साथ जेई शीतल गुरुंग और एई संजय यादव को भी योजना के साथ ले आए। एडवोकेट नेगी के अनुसार सैन्य धाम की योजना बनाते समय इन इंजीनियरों और संबंधित अफसरों ने बेहद लापरवाही बरती कि 48 करोड़ का प्रोजेक्ट महज एक साल में बढ़कर 100 करोड़ हो गया।

आरटीआई से खुलासा हुआ है कि सैन्य धाम में जो मटिरियल उपयोग किया जा रहा है उसकी क्वालिटी और दाम को लेकर भी घोटाला हुआ हैं। नेगी के मुताबिक ठेकेदार को निविदा शर्तों के विपरीत समय-समय पर अग्रिम भुगतान किया गया है। अब तक 35 करोड़ 94 लाख का भुगतान किया जा चुका है। यही नहीं ठेकेदार को बिना निविदा के ही लगभग सात करोड़ 75 लाख रुपये के अतिरिक्त कार्य भी आवंटित कर दिये गये।

एडवोकेट नेगी के अनुसार निविदा के दौरान ठेकेदार की बिड कैपिसिटी को नापा जाता है। इस आधार पर ठेकदार शिवकुमार अग्रवाल की बिड कैपिसिटी लगभग 56 करोड़ है। लेकिन अब यह कार्य 100 करोड़ का हो चुका है। ऐसे में इस ठेकेदार से किस आधार पर सैन्य धाम का कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत सीबीआई को की है और इसके अलावा पीएमओ और सीवीसी को भी इस आशय में दस्तावेजों समेत पत्र प्रेषित किये हैं।

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