गंभीर संकेत दे रहा है चोराबाड़ी ग्लेशियर ,भूवैज्ञानिकों, ग्लेशियर विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि हिमोढ़ों को अनियंत्रित रूप से हटाने से ग्लेशियर के टूटने और पिघलने की घटनाएं बढ़ेंगी, जिससे भविष्य में हिमस्खलन की आवृत्ति बढ़ेगी।
रुद्रप्रयाग। गुरुवार को केदारनाथ के ऊपरी भाग चौराबाड़ी ग्लेशियर में भारी हिमस्खलन हुआ है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। दूसरी तरफ ग्लेशियर टूटने की इस घटना से पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। वीडियो में बर्फ का भारी गुबार तेज रफ्तार के साथ नीचे खिसकते हुए दिखाई दे रहा है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि घटना दोपहर करीब 2 बजे की है। धाम में मौजूद लोगों और मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों ने ऊपरी क्षेत्र में बर्फ का गुबार देखा तो उसकी वीडियो बनाई। गौरतलब है की चोराबाड़ी ही वो झील है जिसके टूटने से 2013 में केदारनाथ भारी तबाही आई थी।
जून 2024 में इस इलाके में केदारनाथ धाम से चार किलोमीटर ऊपर स्थित गांधी सरोवर में भीषण हिमस्खलन हुआ, लेकिन जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ।यह हिमस्खलन चोराबारी ग्लेशियर के पास सुबह करीब पांच बजे हुआ। इस दौरान बर्फ का एक विशाल बादल तेज़ी से पहाड़ से नीचे खिसकता हुआ दिखाई दिया और एक गहरी खाई में गिरकर रुक गया। यह हिमस्खलन केदारनाथ घाटी के ऊपरी छोर पर स्थित बर्फ से ढकी मेरु-सुमेरु पर्वत श्रृंखला के नीचे, चोराबाड़ी ग्लेशियर में गांधी सरोवर के ऊपरी क्षेत्र में हुआ।
इसी इलाके में सितम्बर 2022 के दौरान भी चौराबाड़ी ग्लेशियर के कैचमेंट में एवलॉन्च आया था। तब इससे कोई नुकसान होने की खबर नहीं हुआ था। तब यह एवलॉन्च केदारनाथ मंदिर के पीछे करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर चौराबाड़ी ग्लेशियर पर आया था। .