देहरादून 05 मई। खबरों में सुर्खियां बटोरना कोई हरीश रावत से सीखे , आज उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक पर हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों और उनके परिणामों पर बिस्तृत लेख लिखा है। खास बात ये है कि लेख में उन्होंने प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल,और यशपाल आर्या को योद्धा बताया है, लेकिन वो असली खिलाडी हरक सिंह का नाम ही भूल गए। उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा , कल के चुनाव परिणामों ने हमें एक और मुख्यमंत्री दिया है। केरल की जीत अत्यधिक उल्लेखनीय और उत्साहवर्धक है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ी। कांग्रेस बहुत लंबे समय के बाद सभी सीटों पर स्वतंत्र तरीके से चुनाव लड़ी। समय के साथ तृणमूल कांग्रेस (#TrinamoolCongress) में बिखराव आएगा। त्रिमूल में गए प्राय अधिकांश लोग कांग्रेस मूल के हैं, वह कांग्रेस में ही लौट करके आएंगे। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला अत्यधिक पार्टी की दूरगामी सोच का परिचायक है।
इन चुनाव परिणामों ने उत्तराखंड कांग्रेस के सामने पुनः 2002 की भांति एक अवसर पैदा कर दिया है कि हम कांग्रेस के लिए जीत हासिल करें। 2002 में भी और उससे पहले भी कांग्रेस लगातार एक के बाद एक राज्यों में चुनाव हार रही थी। उत्तराखंड की जीत के बाद बदलाव आया और कांग्रेस उत्तराखंड के बाद हुए चुनावों में एक के बाद एक राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब हुई व वर्ष 2004 में सोनिया जी की सूझबूझ भरे नेतृत्व से केंद्र में यूपीए की सरकार बनी और डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। इस बार भी उत्तराखंड में कांग्रेस की विजय के बाद आगे के रास्ते खुलेंगे और देश भर में कांग्रेस के लोगों का मनोबल बढ़ेगा और साथ-साथ उत्तराखंड के कांग्रेस जनों का सम्मान भी बढ़ेगा। सौभाग्य से हमारे पास चुनावी रण के लिए अर्जुन सरीखे प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, यशपाल आर्या आदि कई योद्धा हैं, इनमें क्षमता है कांग्रेस के लिए जीत प्राप्त करने की। हमें और आप सबको इनके पीछे खड़ा होना चाहिए। समय की चुनौती को देखते हुए सभी सवालों को 1 वर्ष के लिए पीछे करना पड़ेगा और केवल एक लक्ष्य सामने रखकर हमें आगे बढ़ना है कि चुनाव-चुनाव और चुनाव में विजय।
कुछ लोग इधर अपने-अपने कारणों से विचलित होकर के भाजपा में गए हैं। उन्होंने भाजपा में पहले से गए लोगों की आज क्या स्थिति है, उसको समझने का प्रयास नहीं किया। भाजपा में जितने लोग भी गए उनमें जो लोग मंत्री पद पा गए, उनके अलावा शेष सब आकाश के तारे गिन रहे हैं और चौथी, पांचवी पंक्ति में भी उनको स्थान नहीं मिल रहा है। कांग्रेस में जो अग्रिम पंक्ति के नेता होते थे, वह आज भाजपा में दूसरी, तीसरी पंक्ति के भी नेता नहीं हैं। भाजपा से जो कांग्रेस में आए उनसे पूछकर के देखिए कि भाजपा के अंदर मंत्री पद के बावजूद उनकी स्थिति क्या थी? और आज कांग्रेस में उनकी स्थिति क्या है? हमें अपनी बुनियाद और अपनी ही इमारत को मजबूत करना है। मैं खुद 15 मई से राज्य भर में संवाद भ्रमण प्रारंभ कर रहा हूं। मुझे वर्ष 2017 की पराजय का बदला लेना है। मुझसे जितना संभव हो पाएगा कांग्रेस की विजय के लिए योगदान दूंगा।
आप सबके इस प्रयास में चींटी के तरीके से मैं भी निरंतर प्रयत्नशील हूं। कोई दिन, कोई पहर ऐसा नहीं जाता है, जब मैं कांग्रेस का राजनीतिक पक्ष बनाने के लिए या विपक्ष में कटाक्ष करने के लिए कुछ न कुछ नहीं कहता हूं या नहीं लिखता हूं, या करता हूं। आप सबको भी अतिरिक्त ऊर्जा संग्रहित कर अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन के साथ जुड़कर विजय की लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ना है।