राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त शुभ नहीं था।
नितेश बौड़ाई
2 जून 2026 को बृहस्पति का प्रवेश पुनर्वसु नक्षत्र कर्क राशि में हुआ,तथा 6 जून 2026 को राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास में दान चोरी का मामला सामने आया। इसके बाद उज्जैन महाकाल और अब बद्री केदार मंदिर समित्ति में दान के चढ़ावे का मामला सामने आया, जो बृहस्पति के कर्क राशि में उच्च में होने पर उस पर शनि की पांचवी दृष्टि पडी है, जो वैश्विक स्तर पर बड़े बदलवा के संकेत हैं।
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति (गुरु) को ज्ञान, धर्म , न्याय, शिक्षा , अर्थव्यवस्था, बैंकिंग संतति , धार्मिक संस्थाओं और वैश्विक नैतिक व्यवस्था का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्म , अनुशासन, श्रम, न्याय, देरी, कठिन परिश्रम परीक्षा, गरीबी, जनसामान्य और संरचनात्मक का कारक है।
शास्त्रों में बृहस्पति के उच्च होने पर गोचर का फल इस प्रकार बताया गया है।
जन्म लग्ने गुरुश्चैव, रामचंद्रो वने गतः।
तृतीये बलिः पाताले, चतुर्थे हरिश्चन्द्रयोः॥
षष्ठे द्रौपदी हरणं, हन्ति रावणमष्टमे।
दशमे दुर्योधनं हन्ति, द्वादशे पाण्डु वनागतम्॥
अर्थात जन्म लग्न के (पहले भाव) में बृहस्पति (गुरु) के होने पर भगवान राम को वनवास जाना पड़ा ।
तृतीये बलिः पाताले, चतुर्थे हरिश्चन्द्रयोः॥ यदि गुरु तीसरे भाव में हो, तो व्यक्ति को अपने स्थान से दूर (पाताल या अन्य राज्य/स्थान) जाना पड़ सकता है या संघर्ष की स्थिति झेलनी पड़ती है।: चौथे भाव में गुरु होने पर व्यक्ति को राजा हरिश्चन्द्र की तरह भारी कष्ट, मान-सम्मान की हानि या संपत्ति संबंधी संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।
षष्ठे द्रौपदी हरणं, हन्ति रावणमष्टमे। जब कुंडली के छठे भाव में गुरु (बृहस्पति) गोचर करता है, तो यह अत्यधिक अशुभ माना जाता है। इस स्थान के गुरु के प्रभाव से ही महाभारत काल में द्रौपदी का अपमान और वस्त्रहरण जैसी दर्दनाक घटना घटी थी। जब गुरु आठवें भाव में गोचर करता है, तो यह शत्रुओं के विनाश का कारक बनता है। इसी स्थिति या प्रभाव के अंतर्गत महाबली रावण जैसे शक्तिशाली असुर का वध हुआ था।
दशमे दुर्योधनं हन्ति, द्वादशे पाण्डु वनागतम्॥ “दशवें स्थान के गुरु ने दुर्योधन का विनाश किया , और बारहवें स्थान का गुरु राजा पाण्डु की मृत्यु का कारण बना ।”
अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 (मंगलवार ) को हुई थी, उस समय बृहस्पति मेष राशि में गोचर कर रहे थे।, व शनि कुंभ राशि पर गोचर कर रहे थे, इस दौरान शनि की तीसरी दृष्टि बृहस्पति पर पड रही थी। और नवमांश कुंडली में भी उच्च के बृहस्पति पर शनि की दृष्टि पड रही थी, जो वर्तमान गोचर पर भी पढ रही है। जिस कारण मंदिरों चंदा चोरी का विवाद सामने आया। क्योंकि शनि का स्वभाव छिपी हुई व्यवस्थाओं को सार्वजनिक करना तथा उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना भी माना गया है। इस कारण धार्मिक संस्थाओं के कार्यों की समीक्षा, जाँच या विवाद जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गई हैं। । क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य जजमान डॉक्टर अनिल मिश्रा चंदे विवाद के प्रमुख दोषी में से एक हैं । जो मुहूर्त का निर्माण किया गया था वह माननीय प्रधानमंत्री की कुंडली के आधार पर किया गया था ऐसा दावा कुछ मीडिया रिपोर्ट में किया गया था। अतः एक बार फिर सिद्ध होता है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त शुभ नहीं था।