Form-7 की थोक आपत्तियों, फर्जी आवेदनों और DSE/PSE के आधार पर मतदाता नाम प्रभावित करने पर उठाए सवाल
देहरादून 21 अगस्त। देहरादून। उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड से मुलाकात कर भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में थोक में Form-7 आपत्तियां दाखिल कर वैध मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने Manual on Electoral Rolls, March 2023 में निर्धारित प्रक्रिया का हवाला देते हुए इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
किच्छा विधानसभा में लगभग 50 पोलिंग स्टेशनों पर 10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी आपत्तियां दर्ज होने तथा केवल चार व्यक्तियों द्वारा 100 से अधिक आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला ज्ञापन में उठाया गया। कांग्रेस के अनुसार, एक व्यक्ति श्री राजेश तिवारी के नाम से लगभग 6,410 आपत्तियां दाखिल होने की जानकारी मिली है।
कांग्रेस ने पीरान कलियर में विधायक श्री फुरकान अहमद के नाम के विरुद्ध ऐसी आपत्ति दर्ज होने का मामला भी उठाया, जिसे संबंधित व्यक्ति ने शपथपत्र देकर दाखिल करने से इनकार किया है। गदरपुर में दिवंगत महिला के नाम से आपत्ति तथा न्यायिक हिरासत में बंद व्यक्तियों के नाम से आपत्तियां दर्ज होने की शिकायतों की भी जांच की मांग की गई।
प्रदेश कांग्रेस ने ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों की कई विधानसभा सीटों में Form-7 आपत्तियों के असामान्य पैटर्न की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही ऊधमसिंह नगर में DSE/PSE के आधार पर लगभग 1,02,793 मतदाताओं के नाम प्रभावित किए जाने की जानकारी पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
प्रमुख मांगें
विवादित Form-7 और DSE/PSE मामलों में अंतिम नाम हटाने की कार्रवाई जांच पूरी होने तक रोकी जाए।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।
Form-7 के आवेदन, हस्ताक्षर, डिजिटल ट्रेल, CCTV और सत्यापन रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को Form-7 और DSE/PSE मामलों का बूथवार पारदर्शी डेटा उपलब्ध कराया जाए।
किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस एवं अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाना उसके मताधिकार पर सीधा प्रहार है। निर्वाचन आयोग से मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराकर मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महासचिव संगठन राजेंद्र सिंह भंडारी, प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व विधायक मनोज रावत, सूर्यकांत धस्माना,सुजाता पॉल, प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह, महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी शामिल रहे।