चमोली 19 जुलाई। बदरीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हर दिन नए खुलासे भी हो रहे हैं.अब एसआईटी की जांच ने दान से जुड़े अभिलेखों में कथित ओवरराइटिंग का मामला भी सामने आया है. इसके बाद बदरी केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने खजांची संदेश मेहता को उनके पद से हटा दि ।
जानकारी के मुताबिक, एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि दान संबंधी दस्तावेजों में ओवरराइटिंग किन परिस्थितियों में की गई? जांच एजेंसी संदेश मेहता से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि यह बदलाव किसके निर्देश पर किए गए थे या इसके पीछे कोई अन्य कारण था?
इससे पहले गिरफ्तार पूर्व कर्मचारी राजेंद्र चौहान ने पूछताछ में कथित तौर पर कहा था कि वो तत्कालीन वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के निर्देशों पर काम करते थे. एसआईटी इस बयान का अन्य साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है. जबकि, जांच एजेंसी अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से भी लगातार पूछताछ कर रही है.
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे और लोगों से पूछताछ या आवश्यक होने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा सकती है. अब जांच का सबसे बड़ा सवाल ये है कि यदि चढ़ावे में कथित हेराफेरी हुई, तो इसके पीछे निर्णय लेने वाला कौन था और क्या यह किसी संगठित स्तर पर किया गया?
इन सभी पहलुओं की जांच जारी है. मामले में अंतिम स्थिति एसआईटी की जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन इसी बीच बीकेटीसी ने खजांची (कोषपाल) संदेश मेहता को पद से हटा दिया है. इसके अलावा कुबेर के खजाने की भी जांच की जा सकती है. वहीं, बीकेटीसी सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि,
“बदरी केदार मंदिर समिति के कर्मचारी संदेश मेहता को खजांची की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है. पहले संदेश मेहता खजांची के पद पर कार्यरत थे. जो मंदिर के सोना-चांदी समेत डबल लॉकर में सुरक्षित रखी जाने वाली मूल्यवान वस्तुओं की जिम्मेदारी संभालते थे.”-
सोहन सिंह रांगड़, मुख्य कार्याधिकारी, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति