धामी बनेंगे सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री, राज्य की राजनीति में आया ठहराव का दौर

रवि पाराशर
नौ नवंबर, 2000 को उत्तराखंड के गठन के बाद अब लगता है कि राज्य में सत्ता के स्थायित्व का दौर शुरू हो चुका है। करीब ढाई दशक तक राज्य में सत्तारूढ़ रहीं कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का आना-जाना लगा रहा है, लेकिन अब बीजेपी ने निर्णायक बढ़त बना ली है, ऐसा कह सकते हैं। राज्य में बीजेपी के मुख्यमंत्री बीच-बीच में कार्यकाल पूरा करने से पहले ही बदले गए हैं, लेकिन अब पुष्कर सिंह धामी पांच साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा करने वाले बीजेपी के पहले सीएम बन जाएंगे, इसमें कोई संदेह किसी को नहीं होना चाहिए।

पुष्कर सिंह धामी दो कार्यकाल में लगातार पांच साल और आठ महीने से ज्यादा सीएम रहने का रिकॉर्ड तो कायम कर ही लेंगे, साथ ही उत्तराखंड के वोटरों की नब्ज टटोलने पर अभी से लग रहा है कि अगले साल होने वाले चुनावों में धामी ही आगामी सरकार की कमान संभालेंगे। इस तरह धामी भारतीय जनता पार्टी की सोच को उत्तराखंड में विकास की जमीन पर उतारने वाले पहले करिश्माई नेता बन जाएंगे, इसकी पूरी उम्मीद की जानी चाहिए। यह कहना सही होगा कि धामी के नेतृत्व में जनता के विश्वास का शक्तिशाली अथाह बांध उत्तराखंड में बन चुका है।

जनता का विश्वास बढ़ा
आंकड़ों की बात करें, तो वर्ष 2002 से 2007 तक नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। इसके बाद किसी मुख्यमंत्री को यह सौभाग्य नहीं मिल पाया। तिवारी के बाद धामी पहले नेता हैं, जो चार साल आठ महीने से ज्यादा का कार्यकाल सीएम के रूप में पूरा कर चुके हैं। ऐसा हुआ है, तो इसका श्रेय राज्य की जनता में उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता को ही दिया जाना चाहिए। जनता किसी नेता को कब स्वीकार करती है, इस प्रश्न का उत्तर बहुत सरल है। जनता ऐसा तभी करती है, जब वह सरकार के कामों से प्रसन्न हो।

विकसित भारत में अहम भूमिका
खुद सीएम धामी कहते हैं कि उनका संकल्प केवल उत्तराखंड का विकास ही नहीं, बल्कि समग्र और संतुलित विकास है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में वे निरंतर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तराखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बहुत से राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि धामी सरकार ने उत्तराखंड के विकास के लिए सिर्फ योजनाओं की घोषणाएं ही नहीं कीं, बल्कि उन्हें जमीन पर हू-ब-हू उतारने का काम भी किया है।

धामी मानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही उत्तराखंड को समान नागरिकता संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनाना। हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में यूसीसी लागू करने की जरूरत फिर से रेखांकित की थी। इसके बाद गुजरात सरकार ने भी समान नागरिकता कानून की पहल की है, तो यह धामी सरकार के निर्णय पर सकारात्मक मुहर लगाने जैसा ही है। अनुकरण अपेक्षाकृत आसान होता है, पहल करना यानी नजीर बनाना असल हिम्मत की बात होती है, जो उत्तराखंड सरकार ने की है।

चार साल में 32 हजार सरकारी नौकरियां
सरकार का मानना है कि इसके साथ ही मजबूत भू-कानून, कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे ऐतिहासिक निर्णयों ने शासन व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाया है। नकल विरोधी कानून के बाद भर्ती प्रक्रियाओं में राज्य के लोगों का भरोसा बढ़ा है। इसका प्रमाण है कि चार साल में 32 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है।

आर्थिक मोर्चे पर विकास
जानकार मानते हैं कि आर्थिक मोर्चे पर उत्तराखंड ने उल्लेखनीय विकास किया है। वर्ष 2024-25 में राज्य का जीएसडीपी 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2021-22 के मुकाबले डेढ़ गुना बढ़ातरी है। राज्य में प्रति व्यक्ति आमदनी बढ़कर 2.73 लाख रुपये हो गई है। मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है। राज्य की विकास दर 7.23 प्रतिशत रही है।

लाखों लोगों को रोजगार
आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान 3.56 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश जमीन पर उतर चुका है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में उत्तराखंड को “लीडर” का दर्जा मिला है, वहीं एमएसएमई की संख्या बढ़कर करीब 80 हजार तक पहुंच गई है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।

सामाजिक सुरक्षा पर जोर
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना के तहत 61 लाख कार्ड बनाए गए और 17 लाख से ज्यादा मरीजों को 3400 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुफ्त इलाज मिला। महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण, सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत भागीदारी और “लखपति दीदी” योजना के जरिये 2.5 लाख से ज्यादा महिलाओं का सशक्तीकरण किया गया है।

पर्यटन में बना रिकॉर्ड
पर्यटन और धार्मिक आस्था के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। वर्ष 2025 में छह करोड़ से ज्यादा सैलानी उत्तराखंड पहुंचे। चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा में रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंचे। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य जारी हैं। साथ ही, मानसखंड मंदिर माला मिशन और शीतकालीन यात्रा की शुरुआत ने पर्यटन को वर्ष भर सक्रिय बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, रोपवे परियोजनाएं और हेली सेवाओं का विस्तार, कनेक्टिविटी को नई दिशा दे रहे हैं। राज्य में हेलीपोर्ट और हेलीपैड की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

परिवर्तन के चार साल
धामी सरकार के चार वर्ष उत्तराखंड के लिए परिवर्तनकारी रहे हैं। कानून व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था, पर्यटन, सामाजिक कल्याण और बुनियादी ढांचे तक हर क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। केंद्र सरकार के सहयोग और मजबूत नेतृत्व के साथ उत्तराखंड अब विकसित भारत के निर्माण में मजबूत भागीदार बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पिछले चार साल में विकास और विरासत का ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चुने गए गांवों में 270 करोड़ रुपये की लागत से करीब 200 विकास योजनाओं पर काम जारी है। साथ ही, 13 जिलों में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों का शुभारंभ किया गया है। उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना की गई है।

गीता पाठ्यक्रम में शामिल
राज्य के स्कूलों में श्रीमद् भगवद् गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फेसला भी सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खेलों के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड ने पहली बार राष्ट्रीय खेल का आयोजन किया, जिसमें राज्य के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया। प्रदेश में तीर्थ यात्राओं को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े स्तर पर रोपवे परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग से 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे 4,081 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। वहीं, हेमकुण्ड साहिब के लिए गोविंदघाट से 12.4 किलोमीटर रोपवे 2,730 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा।

धार्मिक सर्किट का विकास
कुमाऊं क्षेत्र में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य जारी है। बदरीनाथ धाम को स्मार्ट आध्यात्मिक पहाड़ी कस्बे के रूप में विकसित करने के लिए 255 करोड़ रुपये की योजनाएं चलाई जा रही हैं।

एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा
उत्तराखंड को एडवेंचर टूरिज्म हब बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य में 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोल दिया गया है। आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का आयोजन किया गया, जिसमें 22 राज्यों से 700 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान दे रहा है।

लोकल टू ग्लोबल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से किसानों की आमदनी बढ़ाने की राह खुली है। राज्य में खेती और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए “माल्टा मिशन” की शुरुआत की जा रही है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में माल्टा उत्पादन को नई पहचान मिलेगी। इसके साथ ही “उत्तराखंड महक क्रांति 2026-36” का शुभारंभ कर सुगंधित फसलों की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उत्तराखंड महक नीति के तहत करीब 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों का विकास कर लगभग एक लाख किसानों को इससे जोड़ा जाएगा।

किसानों के लिए नए मौके
जानकार बताते हैं कि उत्तराखंड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी के तहत 2030-31 तक 11 पर्वतीय जिलों के लिए 134.89 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है। मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीना जैसी पारंपरिक फसलों के किसानों को बीज और जैव उर्वरक पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उत्तराखंड कीवी नीति के तहत किसानों को कीवी बागवानी के लिए प्रति एकड़ लागत का 70 प्रतिशत राज-सहायता दी जाएगी।

इसके अलावा, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, देहरादून और टिहरी जिलों में ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को आमदनी के नए मौके मिलेंगे। जानकारों के मुताबिक कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवाचार देखने को मिला है। मिलेट्स नीति, कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट योजना के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के जरिए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहा है।

अभूतपूर्व बजट
उत्तराखंड का बजट अब 1.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह राज्य की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है। कुल मिलाकर, चार साल में उत्तराखंड ने आर्थिक विकास के हर क्षेत्र में संतुलित और तेज विकास किया है। बढ़ती आय, घटती गरीबी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के नए मौकों के साथ राज्य सशक्त और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।
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