कोली को 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, फिर बरी
हरिद्वार : निठारी कांड के बहुचर्चित आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में नाम बदलकर रह रहा था, और भूपतवाला में चाय की दुकान चलाता था। उसका शव चाय की दुकान में फंदे पर मिला। सुरेंद्र कोली घटना के बाद से अपने पैतृक गांव में यदा-कदा आया हो। उसका मकान भी खंडहर हो चुका है। लेकिन उसकी मौत के बाद से अल्मोड़ा जिला फिर सुर्खियों में है।
सुरेंद्र कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे क्षेत्र के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था। वह सातवीं तक पढ़ा था और रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया था। बाद में वह नोएडा में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने लगा। दिसंबर 2006 में निठारी में बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल मिलने के बाद मामला देशभर में सुर्खियों में आया। इसके बाद कोली को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ कई मुकदमे चले।
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में उसे दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति बरकरार रखी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रिम्पा हालदार मामले में भी उसकी दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी। इसके साथ निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम दोषसिद्धि भी समाप्त हो गई और उसे बरी कर दिया गया। बरी होने के बाद कोली जेल से बाहर आया और बाद में हरिद्वार में रहने लगा।
शुक्रवार को उसकी मौत की सूचना ने एक बार फिर निठारी कांड की करीब दो दशक पुरानी कहानी को चर्चा में ला दिया। पुलिस फिलहाल मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है।