पिथौरागढ़। उत्तराखंड का सीमांत जिला पिथौरागढ़ पहले से ही डॉक्टरों की भारी किल्लत झेल रहा था, जिस कारन स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी । इस बीच जिले के 22 डॉक्टर पोस्ट ग्रेजुएट करने के लिए एक के बाद एक करके यहाँ से चलता बने । मगर स्वास्थ्य विभाग की नाक में जूं तक नहीं रेंगा। जनता की मुसीबतें बढ़ती चली गई और स्वास्थ्य विभाग आखें मूंदकर बैठा रहा । चिंताजनक बात यह है कि पिछले चार वर्षों के दौरान ये डॉक्टर एक-एक कर पीजी के लिए गए लेकिन डिग्री पूरा होने के बाद एक भी डॉक्टर वापस नहीं लौटा।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिले के अस्पतालों में तैनात 22 डॉक्टर बीते चार साल के भीतर शासन से अनुमति लेकर पीजी के लिए गए। इनमें से कई डॉक्टरों की पढ़ाई पूरी हो चुकी है लेकिन वे वापस नहीं लौटे हैं। कागजों में तो इनकी तैनाती है लेकिन ये अस्पतालों में मौजूद नहीं हैं।