मोहान क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना बाघ 30 दिन बाद पकड़ा गया

अल्मोड़ा, 03 सितम्बर । उप संभागीय वनाधिकारी काकुल पुंडीर ने बताया कि मोहान वन क्षेत्र के गोदी अनुभाग के अंतर्गत ग्राम सभा डबरा सौराल के तोक घोड़ीधार में दिनांक 03 अगस्त 2026 को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना के उपरांत वन विभाग द्वारा क्षेत्र में बाघ की लगातार निगरानी एवं रेस्क्यू के लिए व्यापक अभियान संचालित किया गया।

घटना के बाद से क्षेत्र में ट्रैप कैमरों, ड्रोन तथा गठित गश्ती टीमों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही थी। गश्ती दलों द्वारा क्षेत्र में बाघ के पगमार्क एवं अन्य वन्यजीव गतिविधियों के चिन्हों की खोजबीन करते हुए नियमित गश्त की गई। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करते हुए क्षेत्रवासियों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया तथा विभिन्न स्थानों पर प्रचार-प्रसार, पोस्टर एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सक्रिय वन्यजीव के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए पिंजरे, ट्रैंक्विलाइजिंग गन, जाल सहित आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों की सहायता से मोहान वन क्षेत्र एवं पश्चिमी वृत्त की रेस्क्यू विशेषज्ञ टीम द्वारा लगातार अभियान चलाया गया।

रेस्क्यू अभियान का दायरा बढ़ाते हुए अतिरिक्त टीमों का गठन किया गया, जिसमें मोहान रेंज के अतिरिक्त रानीखेत रेंज, अल्मोड़ा रेंज, जौरासी रेंज, भूमि संरक्षण रामनगर तथा मंदाल रेंज, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वन कर्मियों को भी तैनात किया गया। गठित टीमों द्वारा क्षेत्र में लगातार गश्त एवं निगरानी के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने एवं आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया गया। रेस्क्यू विशेषज्ञ टीम में नैनीताल वन प्रभाग के डॉ. हिमांशु पांगती एवं पश्चिमी वृत्त के डॉ. राहुल सती के साथ मोहान रेंज के वन कर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान संचालित किया गया।

वन विभाग द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों, सघन निगरानी एवं व्यापक रेस्क्यू अभियान के फलस्वरूप बुधवार रात 11ः00 बजे उक्त क्षेत्र से एक वयस्क बाघ का सफल एवं सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। रेस्क्यू के उपरांत बाघ को आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण हेतु रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। वन विभाग के इस सफल रेस्क्यू अभियान से क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित स्थिति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है तथा स्थानीय ग्रामीणों में भी राहत की भावना है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी एवं आवश्यक सतर्कता आगे भी जारी रखी जाएगी।

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