कब बनकर तैयार होगा नरकोटा का सिगनेचर वैली ब्रिज ?

रूद्रप्रयाग में ऋषिकेश बदरीनाथ हाईवे 58 पर नरकोटा के पास बन रहा है प्रदेश का पहला सिगनेचर वैली ब्रिज

सिग्नेचर पुल का निर्माण कार्य आरसीसी कम्पनी कर रही है।

राकेश चंद्र / दिलबर सिंह

रुद्रप्रयाग 08 मार्च। ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर नरकोटा में 70 करोड़ की लागत से 110 मीटर ऊँचा सिग्नेचर ब्रिज पांच साल बीतने के बाद भी केंद्र व राज्य सरकार की लापरवाही के चलते अधर में लटका हुआ है । सिग्नेचर पुल का निर्माण कार्य आरसीसी कम्पनी कर रही है। पुल निर्माण का काम 2021 में धूम धाम के साथ शुरू हुआ था, लेकिन जुलाई 2022 में इस पुल की शटरिंग गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई। समय बीता और ब्रिज का ऊपरी फ्रेम बनकर लगभग तैयार भी हो गया था, मगर जुलाई 2024 में एक बार फिर से पुल का रुद्रप्रयाग की तरफ वाला टॉवर ढह गया, जिससे फ्रेम भी ध्वस्त हो गया। लेकिन तब से अब तक वैली ब्रिज का सपना आज भी सपना ही है। जांच हुई जिसमें बताया गया कि टॉवर और फ्रेम के ध्वस्त होने का कारण ज्यादा वजन था।

 

मामले में प्रोजेक्ट मैनेजर और जेई के खिलाफ पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया,सितंबर 2025 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार सैनी की अदालत ने आरसीसी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ज्योति प्रकाश शर्मा और जेई मुकेश गुप्ता को दोषी करार दिया था । अदालत ने दोनों को अलग-अलग धाराओं में कुल चार साल छह माह की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने कहा कि जानकारी मिली है कि निर्माणाधीन पुल दूसरी बार टूट कर गिरा है, परंतु शायद इस संदर्भ में शासन-प्रशासन के स्तर से कोई विधिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। यह परियोजना भ्रष्टाचार का एक जीवंत उदाहरण है।

NHAI की देखरेख में निर्माणाधीन इस पुल का काम आज भी बंद है। ब्रिज का निर्माण जिस कंपनी की ओर से किया जा रहा है वही कंपनी सिरोबगड़ ब्रिज भी बना रही है जिसके एलाइनमेंट को लेकर भी शिकायत की जा चुकी है. नरकोटा ब्रिज में भी एलाइनमेंट को लेकर सवाल उठते रहे हैं । नाम न छापने की शर्त पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के एक अधिकारी ने बताया कि नरकोटा सिगनेचर वैली ब्रिज को अब पूरी तरह से रीडिज़ाइन किया गया है। रीडिज़ाइन में इस बात का ध्यान रखा गया है कि पुल के ऊपरी फ्रेमों का वजन ज्यादा न हो, जो पहले हुआ था, उन्होंने बताया कि जल्द ही ब्रिज पर काम शुरू होने जा रहा है, व अनुमानित एक साल में कंस्ट्रक्शन का काम पूरा कर लिया जाएगा।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने इस मामले में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया व तहसील दिवस पर इस मामले पर सम्बंधित बिभाग से जानकारी लेने की बात कही है । गौरतलब है कि विशाल मिश्रा हाल ही में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी बने हैं। मामले में उत्तराखण्ड क्रांति दल के जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह कण्डारी, कांग्रेस जिला प्रवका नरेन्द्र सिंह बिष्ट ने उत्तराखंड और नेशनल हाईवे अथॉरिटी पर आरोप लगाया कि ठेकेदारों पर इन बिभागों की कोई पकड़ नहीं रही है। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार सैनी की अदालत ने भी इस प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार का एक जीवंत उदाहरण बताया था ।

 

 

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