अल्मोड़ा, 28 मई। उत्तराखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. पंडित राजेंद्र प्रसाद अणथवाल ने आज कलेक्ट्रेट सभागार, अल्मोड़ा में जनपद अंतर्गत संचालित निराश्रित गौकल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जनपद की संचालित एवं निर्माणाधीन गौशालाओं की स्थिति, गौवंश संरक्षण, टैगिंग कार्यों तथा गौसेवकों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई।अध्यक्ष ने कहा कि गोवंश को “आवारा” न कहकर “निराश्रित गोवंश” अथवा “नंदी बाबा” कहकर संबोधित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा इस दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
बैठक में गौसेवकों ने पानी की कमी, गौशालाओं के विस्तारीकरण संबंधी लंबित मामलों तथा भूसा-चारे में आग लगाने जैसी घटनाओं की जानकारी दी। इस पर अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन चेकिंग करने तथा पशु तस्करी की संभावनाओं पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑपरेशन कामधेनु को प्रभावी पहल बताते हुए कहा कि टैगिंग के माध्यम से निराश्रित पशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है तथा इस कार्य में पुलिस एवं नगर निकायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
अध्यक्ष ने मासी क्षेत्र में गौशाला के समीप आगजनी की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही गौसेवकों के साथ नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने को कहा, जिसमें पशु चिकित्सा अधिकारी नोडल अधिकारी रहेंगे।उन्होंने लंबे समय से लंबित गौशाला निर्माण कार्यों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें एक माह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक गौशाला को लिफ्टिंग मशीन उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर निगम एवं नगर पालिकाओं को भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अध्यक्ष ने कहा कि गौसेवा पुण्य कार्य है। गौशालाओं में सीसीटीवी एवं जीपीएस लगाए जाएं तथा बायोगैस, गोमूत्र एवं गोबर से उत्पाद निर्माण कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने केंचुआ खाद निर्माण को भी बढ़ावा देने की बात कही।बैठक में गोवंश की टैगिंग कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि टैगिंग के साथ गोपालक का फोटो भी संलग्न किया जाए। उन्होंने वर्ष 2026 में प्रत्येक क्षेत्र में 25 ग्राम गौसेवक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित करने तथा पशु चिकित्सकों को गांव-गांव जाकर योजना की जानकारी देने के निर्देश दिए।
उन्होंने गोवंश के जन्म एवं मृत्यु का समुचित अभिलेखीकरण करने तथा समय-समय पर उनकी नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में आयोग सदस्य दया कृष्ण कांडपाल, लक्ष्मण सिंह, जिला विकास अधिकारी संतोष कुमार पंत, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ योगेश अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं अन्य उपस्थित थे।