वन पंचायतों में आजीविका संवर्धन एवं गैर काष्ठीय वन उपज विकास पर जिलाधिकारी ने की बैठक।

अल्मोड़ा, 3 मई। जनपद की वन पंचायतों में गैर काष्ठीय वन उपज (एनटीएफपी) के विकास तथा हर्बल एवं अरोमा टूरिज्म परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में जिलाधिकारी कैमो कार्यालय में क्लस्टर लेवल मॉनिटरिंग समिति (सीएलएमसी) की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित करते हुए कहा कि परियोजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों को क्लस्टर आधारित मॉडल पर विकसित किया जाए, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके तथा स्थानीय स्तर पर अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों का चयन इस प्रकार किया जाए और उनमें गतिविधियों का क्रियान्वयन ऐसी योजना के साथ किया जाए जिससे ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्थायी आजीविका के अवसर सृजित हों।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद की वन संपदा, औषधीय एवं सगंध पौधों की प्रचुरता को स्थानीय आर्थिक विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजना को जनहितकारी एवं परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से वन पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को पहचान और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाए।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि “गैर काष्ठीय वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं अरोमा टूरिज्म परियोजना” सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य वन पंचायतों में गैर काष्ठीय वन उपज, औषधीय एवं सगंध वनस्पतियों को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को आजीविका से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना राज्य में 10 वर्षों के लिए संचालित की जा रही है, जिसे वर्ष 2023-24 से प्रारंभ किया गया है तथा यह वर्ष 2033-34 तक प्रभावी रहेगी।

उन्होंने बताया कि योजना केवल वन पंचायतों के लिए लागू है। चयनित वन पंचायतों में विभिन्न विभागों द्वारा तकनीकी एवं अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, जबकि परियोजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों का क्रियान्वयन स्थानीय समुदाय एवं वन पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा। इससे ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ेगी तथा उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह, प्रदीप धौलाखंडी, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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