देहरादून 20 अप्रैल। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों के सम्मुख उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 30 अप्रैल से विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि उत्तराखंड सरकार भी विशेष सत्र आहूत करने जा रही है, तो उसका उद्देश्य केवल राजनीतिक निंदा प्रस्ताव पारित करना या विपक्ष को कोसना नहीं होना चाहिए।
गोदियाल ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा सत्र जनता के सरोकारों और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के लिए बुलाए जाते हैं, न कि राजनीतिक प्रतिशोध या आरोप-प्रत्यारोप के लिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया कि यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो उसमें महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विषय — महिला आरक्षण — को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण कानून देश की आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी का संवैधानिक अधिकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार को चाहिए कि वह इस कानून को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए ठोस प्रस्ताव विधानसभा में पारित करे।
गोदियाल ने आगे कहा कि भाजपा सरकारें महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात तो करती हैं, लेकिन जब ठोस कदम उठाने का समय आता है तो वह राजनीतिक मुद्दों में उलझ जाती हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां महिलाएं सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ हैं, वहां महिला आरक्षण को टालना या उस पर मौन रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि प्रस्तावित विशेष सत्र को जनहित और महिला सशक्तिकरण के एजेंडे पर केंद्रित किया जाए और महिला आरक्षण कानून को शीघ्र लागू करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाए।