12 अगस्त 2026 का खंडग्रास सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त 2026 का खंडग्रास चंद्र ग्रहण : खगोलीय स्वरूप, ज्योतिषीय विश्लेषण एवं विश्व पर संभावित प्रभाव
नितेश बौड़ाई
अगस्त माह में एक के बाद एक दो ग्रहण पड़ रहे हैं , इन ग्रहणों का विश्लेषण किया पंडित नितेश बौड़ाई ने , उनके अनुसार 12 अगस्त 2026 को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण वर्ष 2026 की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में से एक है। जो भारतीय पंचांग के अनुसार श्रावण अमावस्या को रात्रि 9:04 से रात्रि 1:27 तक दिखाई देगा। इस अवधी में चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से अवरुद्ध करेगा जो खंडग्रास सूर्य ग्रहण कहलाएगा। यह ग्रहण यूरोप के अधिकतर देश उत्तर पश्चिम अफ्रीकी देशों में, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी अटलांटिक, स्पेन तथा अन्य उत्तरी क्षेत्रों दिखाई देगा।
भारत में यह ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई नहीं देगा।
खण्डग्रास चन्द्रग्रहण (28 अगस्त, 2026 ई., शुक्रवार) -यह खण्डग्रास चन्द्रग्रहण श्रावण पूर्णिमा, शुक्रवार को भा. स्टैं.टा. अनुसार प्रातः 8.04मिं. से दोपहर 11षं.-22 मिं. तक दिखाई देगा। यह खण्डग्रास चन्द्रग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी एशिया (पाकिस्तान, अफगानिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र सहित, ईरान, ईराक, सऊदी अरब, शारजाह आदि), अफ्रीका, अधिकतर यूरोप, अधिकतर उत्तर दक्षिणी अमरीका, हिन्द-प्रशान्त महासागर में दृश्य होगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा तथा न ही इसका कोई प्रभाव होगा। अर्थात दोनों ग्रहों में सूतक आदि का विचार नहीं किया जाएगा ।
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से सूर्य–चंद्र–पृथ्वी की अद्भुत ज्यामितीय घटना है, जबकि वैदिक ज्योतिषीय दृष्टि से यह सूर्य-प्रधान सिंह राशि में घटित होने के कारण सत्ता, नेतृत्व, प्रतिष्ठा एवं सामूहिक व्यवस्था से जुड़े विषयों के अध्ययन का महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है।
सिंहे पुलिन्दगणमेकलसत्त्वयुक्तान् राजोपमान्त्ररपतीन् वनगोचरांश्च ।(वृहत संहिता)
ज्योतिषीय संहिता-परंपरा के अनुसार यदि सिंह राशि में स्थित सूर्य और चन्द्रमा पर ग्रहण पड़े, तो इसका प्रभाव उन वर्गों पर विशेष रूप से माना जाता है जिनका संबंध वन, समूह-संगठन, नेतृत्व, प्रभुत्व तथा राजकीय जीवन-शैली से है।
ऐसी स्थिति में वनवासी एवं वन-आश्रित जातियों, विभिन्न प्रकार के गण, समूह, दल अथवा राजनीतिक संगठनों, तथा सत्त्वप्रधान, प्रभावशाली और दबंग व्यक्तियों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना मानी गई है। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति जो राजा अथवा उच्च पदस्थ व्यक्ति के समान वैभवपूर्ण या अधिकारपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं, तथा वन, जंगलात एवं वन-संपदा से जुड़े कार्यों में संलग्न लोग भी ग्रहण के प्रभाव से कष्ट, असुविधा अथवा संकट का सामना कर सकते हैं।
सिंह राशि का संबंध परंपरागत रूप से सत्ता, नेतृत्व, प्रभुत्व, राजकीय प्रतिष्ठा और प्रभावशाली व्यक्तित्वों से माना जाता है। 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण घटित होगा जो भारतीय पंचांग एवं वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण कुम्भ राशि के शतभिषा नक्षत्र में होगा।
कुम्भेऽन्तर्गिरिजान् सपश्चिमजनान् भारोद्वहांस्तस्करा-नाभीरान् दरदाऽऽयसिंहपुरकान् हन्यात्तया वर्वरान् ।(वृहत संहिता)
आचार्य ब्रह्मवीर के अनुसार कुंभ राशि में यदि ग्रहण हो तो ऊंचे स्थान पर रहने वाले लोग तथा पश्चिम के देशों में,भार ढोने वाले श्रमिक एवं मजदूरों को तथा सत्ता पर बैठ बड़े लोग विशिष्ट मंत्रियों को व्यक्तियों को तथा जल के संबंधित काम करने वाले लोगों को कष्ट होता है।
निष्कर्ष : दोनों ग्रहणों के बीच लगभग एक पक्ष का अंतर
12 अगस्त का सूर्यग्रहण और 28 अगस्त का चंद्रग्रहण लगभग 16 दिनों के अंतर पर हो रहे हैं। खगोलीय रूप से इसका कारण यह है कि सूर्यग्रहण अमावस्या के आसपास तथा चंद्रग्रहण पूर्णिमा के आसपास संभव होता है। यूरोपीय देश तथा अफ्रीकन देश में बड़े प्राकृतिक बदलाव वह आपदाओं के योग बन रहे हैं तथा कुछ पश्चिमी देशों में आकस्मिक सत्ता परिवर्तन के प्रबल योग बन रहे हैं, निकट भविष्य में अफ्रीका या दक्षिणी अमेरिकी देशों में बड़े भूकंप के योग बन रहे हैं। तथा एक बार फिर युद्ध की चिंगारी रूस और यूक्रेन के मध्य तथा अमेरिका और ईरान के मध्य में बढ़ सकती है।
भारतीय उपमहाद्वीप की बात करें तो पर्वतीय प्रदेशों में रहने वाले लोगों को कष्ट हो सकता है तथा कुछ पर्वतीय राज्यों में सत्ता के भी परिवर्तन के योग बनते हैं।